ग्रंथसार
अयोध्या के सुरम्य उपवन में जब मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और माता सीता एक साथ बैठे, तब भविष्य की करुण लीला की नींव कैसे पड़ी, आइए यह पावन प्रसंग सुनें।
उत्तरकाण्ड · सर्ग 42
अशोक वाटिका में श्रीराम-सीता और सीता जी का मनोरथ