ग्रंथसार
राजधर्म और लोकनिंदा के भीषण द्वंद्व में घिरे प्रभु श्रीराम ने जब अपने भाइयों के सम्मुख अपने हृदय की व्यथा प्रकट की, तो अयोध्या के राजमहल में मौन का गहरा अंधकार छा गया।
उत्तरकाण्ड · सर्ग 45
श्रीराम का कठोर निर्णय