ग्रंथसार
गंगा पार लौटते हुए जब लक्ष्मण का हृदय माता सीता के विछोह से विदीर्ण हो रहा था, तब सुमन्त्र ने उन्हें समय और नियति का वह गूढ़ रहस्य स्मरण कराया।
उत्तरकाण्ड · सर्ग 50
सुमन्त्र द्वारा लक्ष्मण को सान्त्वना एवं दुर्वासा की भविष्यवाणी