ग्रंथसार
सभा में गूंजती देवर्षि मुनि नारद की वाणी ने यह रहस्य प्रकट किया कि किस प्रकार काल और धर्म की मर्यादा का उल्लंघन प्रजा पर संकट बनकर आता है।
उत्तरकाण्ड · सर्ग 74
देवर्षि नारद द्वारा अकाल मृत्यु का कारण-वर्णन