ग्रंथसार
सुनिए कथा उस दिव्य वन की, जहाँ प्रवेश करते ही प्रतापी राजा इल का स्वरूप और संपूर्ण जीवन एक क्षण में बदल गया।
उत्तरकाण्ड · सर्ग 84
राजा इल का स्त्री-रूप में परिवर्तन