ग्रंथसार
राजा इल की पावन कथा का समापन करते हुए मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने नैमिषारण्य में महायज्ञ अश्वमेध के अनुष्ठान का पावन संकल्प लिया।
उत्तरकाण्ड · सर्ग 90
श्रीराम द्वारा अश्वमेध यज्ञ का संकल्प