ग्रंथसार
आइए सुनें, जब नैमिषारण्य के विशाल यज्ञमण्डप में दो मुनिकुमारों की मधुर वीणा पर श्रीराम की अपनी ही अमर गाथा गूँज उठी।
उत्तरकाण्ड · सर्ग 94
श्रीराम की सभा में लव और कुश का रामायण-गान