ग्रंथसार
विभीषण का हितोपदेश: लंका में अपशकुन बढ़ रहे थे, पर रावण अपना हठ छोड़ने को तैयार नहीं था।
युद्धकाण्ड · सर्ग 10
रावण द्वारा महती सभा का आयोजन