ग्रंथसार
रणभूमि में जब रावण ने महाविनाशक शक्ति का संधान किया, तब भ्रातृप्रेम और पराक्रम की एक अभूतपूर्व परीक्षा आरंभ हुई।
युद्धकाण्ड · सर्ग 100
लक्ष्मण पर रावण की अमोघ शक्ति का प्रहार