ग्रंथसार
रत्नों से जगमगाती लंका की राजसभा सज रही थी, पर उस अपार वैभव के बीच रावण का अपना मन अशांत था।
युद्धकाण्ड · सर्ग 11
रावण का भव्य राजसभा का आयोजन