ग्रंथसार
रणभूमि में अपने अजेय पति रावण के निष्प्राण देह को देखकर पटरानी मन्दोदरी के हृदय से फूटा वह वेदनामय विलाप, जिसमें सत्य और पश्चाताप की गहरी गूंज थी।
युद्धकाण्ड · सर्ग 111
मन्दोदरी का विलाप