ग्रंथसार
कुम्भकर्ण ने भरी सभा में रावण की भूल उजागर की—फिर उसी भूल से उपजे संकट को अपने बल से मिटाने का बीड़ा उठा लिया।
युद्धकाण्ड · सर्ग 12
रावण की सभा और कुम्भकर्ण का उद्बोधन