ग्रंथसार
प्रासाद की ऊँचाई से शत्रु की शक्ति तो दिखाई दे रही थी, पर रावण उस सत्य को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं था।
युद्धकाण्ड · सर्ग 29
प्रासाद के शिखर से वानर सेना का अवलोकन