ग्रंथसार
जिस विश्वास को रावण धमकियों से नहीं डिगा सका, उसे तोड़ने के लिए अब वह असत्य को प्रत्यक्ष प्रमाण का रूप देने चला था।
युद्धकाण्ड · सर्ग 31
रावण का मायावी षड्यंत्र और असत्य कथन