ग्रंथसार
जिस मुख को देखकर जीवन में आशा जागती थी, उसी की मायावी छवि आज माता सीता को असह्य शोक में डुबो रही थी।
युद्धकाण्ड · सर्ग 32
मायावी शीश देखकर सीता का विलाप