ग्रंथसार
सुवेल से दिखाई देती लंका केवल एक दुर्ग नहीं थी—वनों, उपवनों और आकाश छूते प्रासादों से सजी वह नगरी वानरवीरों को भी विस्मित कर रही थी।
युद्धकाण्ड · सर्ग 39
सुवेल पर्वत से लंका का दर्शन