ग्रंथसार
जिस लंका की दुर्गमता पर रावण को अभिमान था, उसी के चारों ओर वानरों का अपार समुद्र देखकर उसका मन विषाद से भर उठा।
युद्धकाण्ड · सर्ग 42
वानर सेना द्वारा लंका की घेराबंदी