ग्रंथसार
किसी के हाथ में धनुष था, किसी के हाथ में उखड़ा हुआ वृक्ष—लंका की रणभूमि में अब एक-एक वीर दूसरे की शक्ति की परीक्षा लेने लगा था।
युद्धकाण्ड · सर्ग 43
वानरों और राक्षसों के बीच द्वंद्व युद्ध