ग्रंथसार
अंगद ने इन्द्रजित का रथ तोड़कर उसका गर्व चूर कर दिया, पर उस घोर रात्रि में प्रत्यक्ष पराक्रम के सामने अब अदृश्य माया उतर आई थी।
युद्धकाण्ड · सर्ग 44
घोर रात्रि-युद्ध और अंगद का पराक्रम