ग्रंथसार
रणभूमि में दोनों भाइयों को निश्चेष्ट देखकर माता सीता को अपना सौभाग्य मिटता हुआ लगा—पर त्रिजटा ने उसी दृश्य में उनके जीवित होने के संकेत पहचान लिए।
युद्धकाण्ड · सर्ग 48
सीता का विलाप