ग्रंथसार
वज्रदंष्ट्र रणभूमि की ओर बढ़ा तो था विजय की आकांक्षा लेकर, पर उसके राक्षसों को शीघ्र ही वीर अंगद के प्रहारों से बचने के लिए उसी की शरण लेनी पड़ी।
युद्धकाण्ड · सर्ग 54
राक्षस वज्रदंष्ट्र का युद्ध के लिए प्रस्थान