ग्रंथसार
रणभूमि में ऐसी धूल उठी कि शत्रु की पहचान मिट गई—और योद्धाओं के प्रहार अपने ही पक्ष पर पड़ने लगे।
युद्धकाण्ड · सर्ग 55
अकम्पन का रणभूमि में प्रवेश