ग्रंथसार
अकम्पन ने बाणों से पर्वत-शिखर तो काट दिया, पर श्री हनुमान के बढ़ते हुए वेग को रोकना उसके वश में नहीं था।
युद्धकाण्ड · सर्ग 56
हनुमान जी द्वारा अकम्पन का वध