ग्रंथसार
जिस रावण को अपने बल पर अटूट विश्वास था, आज उसी की अंतिम बड़ी आशा गहरी नींद में डूबे कुम्भकर्ण को जगाने पर टिक गई थी।
युद्धकाण्ड · सर्ग 60
कुम्भकर्ण को जगाने का रावण का आदेश