ग्रंथसार
जिस कुम्भकर्ण पर लंका को अपने बल का गर्व था, उसी के सामने आज रावण को अपना संकट खोलकर रखना था।
युद्धकाण्ड · सर्ग 62
कुम्भकर्ण का रावण के राजभवन में गमन