ग्रंथसार
जिस कुम्भकर्ण के प्रहारों से पूरी वानर-सेना डगमगा रही थी, उसका पर्वताकार बल भी भगवान श्रीराम के बाणों के सामने टिक नहीं सका।
युद्धकाण्ड · सर्ग 67
कुम्भकर्ण वध