ग्रंथसार
अतिकाय के वध का समाचार सुनकर रावण के सामने केवल पुत्र-वियोग नहीं, अपने अजेय समझे जाने वाले बल के विनाश का प्रश्न भी खड़ा हो गया।
युद्धकाण्ड · सर्ग 72
रावण का शोक और लंका की सुरक्षा की आज्ञा