ग्रंथसार
कम्पन की गदा से लेकर कुम्भ की बाणवर्षा तक—उस संग्राम में वानरवीरों की शक्ति ही नहीं, आघात सहकर फिर उठ खड़े होने का साहस भी परखा गया।
युद्धकाण्ड · सर्ग 76
कम्पन, प्रजङ्घ और अन्य राक्षसों का संहार