ग्रंथसार
इंद्रजीत के अंत के पश्चात जब लक्ष्मण श्रीराम के सम्मुख पहुँचे, तो प्रभु के नेत्रों से प्रेम और कृतज्ञता के अश्रु छलक उठे।
युद्धकाण्ड · सर्ग 89
इंद्रजीत-वध के उपरांत श्रीराम का हर्ष