ग्रंथसार
पुत्रशोक की अग्नि में जलते हुए दशग्रीव रावण ने जब समस्त लंका की शक्ति को एकत्र कर रणभूमि की ओर पग बढ़ाए, तो दिशाएं भी कांप उठीं।
युद्धकाण्ड · सर्ग 94
रावण का सेना सहित युद्धभूमि की ओर प्रस्थान