ग्रंथसार
जब विनाश निकट आता है, तब काल के वश में होकर प्राणी प्रकृति की चेतावनियों को भी अनदेखा कर देता है।
युद्धकाण्ड · सर्ग 98
अशुभ संकेतों के बीच रावण का रणभूमि में प्रवेश