ग्रंथसार
भरत और भगवान राम का मिलन ऐसा था मानो धरती और आकाश अपने अश्रुओं से एक-दूसरे को नहला रहे हों।
अयोध्याकाण्ड · प्रसंग 13
चित्रकूट में भावपूर्ण मिलन