ग्रंथसार
श्री राम की कथा का सागर अपार है, जिसे कवि ने अपनी श्रद्धा की छोटी सी नौका में समेटने का प्रयास किया है।
बालकाण्ड · प्रसंग 1
कवि की वंदना और शिव-पार्वती संवाद