ग्रंथसार
चित्रकूट की पावन धरा पर भ्रातृ-प्रेम का वह दृश्य उपस्थित हुआ जिसे देखकर प्रकृति भी स्तब्ध रह गई।
बालकाण्ड · प्रसंग 10
भरद्वाज आश्रम और भरत का आगमन