ग्रंथसार
चित्रकूट से लौटने के बाद अयोध्या की सूनी गलियों में छाया सन्नाटा मानो राजा दशरथ के प्राणों के विदा होने की प्रतीक्षा कर रहा था।
बालकाण्ड · प्रसंग 12
अयोध्या वापसी और दशरथ का देह त्याग