ग्रंथसार
मिथिला के आंगन में हर्ष और विछोह के मिले-जुले भावों के बीच बारात की विदाई की बेला आ गई।
बालकाण्ड · प्रसंग 27
विदाई और अयोध्या की ओर प्रस्थान