ग्रंथसार
महोत्सव का वह क्षण उपस्थित हुआ जब जनक के दरबार में सदियों से पूजित भगवान शिव का धनुष प्रभु के कोमल हाथों के स्पर्श मात्र से ही बिखर गया।
बालकाण्ड · प्रसंग 34
शिव धनुष भंग