ग्रंथसार
मिथिला की पावन धरा पर जब चार पुत्रों का विवाह हुआ, तो ऐसा लगा मानो धरा और आकाश एक दूसरे के सुखद मिलन में झूम उठे हों।
बालकाण्ड · प्रसंग 35
मिथिला में विवाह उत्सव