ग्रंथसार
मिथिला की सभा में भगवान शिव-धनुष का टूटना न केवल एक प्रतिज्ञा की पूर्णता थी, बल्कि युगों से प्रतीक्षित दिव्य मिलन का शुभारंभ भी था।
बालकाण्ड · प्रसंग 6
धनुष-भंग और मिथिला का विवाह प्रसंग