ग्रंथसार
अयोध्या की गलियों में आनंद की लहर दौड़ रही थी, पर भाग्य के गर्भ में कुछ और ही लिखा था।
बालकाण्ड · प्रसंग 7
राज्याभिषेक की तैयारी और विधाता का खेल