ग्रंथसार
रावण के दर्बार में अंगद के अडिग साहस ने यह सिद्ध कर दिया कि सत्य के साथ रहने वाले की शक्ति का कोई अंत नहीं होता।
लङ्काकाण्ड · प्रसंग 2
दूत का संदेश