ग्रंथसार
लंका के द्वारों पर मंडराते मृत्यु के साये और राक्षसों की गर्जना से पूरा ब्रह्मांड कांप उठा।
लङ्काकाण्ड · प्रसंग 4
घेराबंदी और युद्ध का उग्र रूप