ग्रंथसार
अशोक वृक्ष की छाया में बैठी माँ जानकी को देखकर श्री हनुमान जी का हृदय द्रवित हो गया, मानों पतझड़ में वसंत की पहली किरण दिखाई दी हो।
सुन्दरकाण्ड · प्रसंग 11
अशोक वाटिका में पवित्र भेंट