ग्रंथसार
प्रभु श्री राम का संदेश देकर श्री हनुमान जी ने असुरों के अहंकार को चूर-चूर करने का संकल्प लिया।
सुन्दरकाण्ड · प्रसंग 4
अशोक वाटिका का विध्वंस