ग्रंथसार
रावण के दरबार में विभीषण ने सत्य का मार्ग चुना और प्रभु श्री राम की शरण में आने का निश्चय किया।
सुन्दरकाण्ड · प्रसंग 6
विभीषण का परामर्श और सेतु-बंध