ग्रंथसार
पक्षीराज गरुड़ के समक्ष कागभुशुण्डि ने भक्ति के गहन रहस्यों को खोलकर रख दिया।
उत्तरकाण्ड · प्रसंग 11
कागभुशुण्डि का उपदेश