ग्रंथसार
ज्ञान और वैराग्य के संगम पर स्थित कागभुशुण्डि का वह दिव्य आख्यान, जो गरुड़जी के हृदय में भक्ति का अखंड दीप प्रज्वलित कर देता है।
उत्तरकाण्ड · प्रसंग 19
कागभुशुण्डि का अनन्त ज्ञान