ग्रंथसार
भगवान राम नाम की वह अमोघ शक्ति, जिसके स्मरण मात्र से तुलसीदासजी का हृदय भावों से भरकर जगत के कल्याण के लिए अंतिम मंगल कामना करता है।
उत्तरकाण्ड · प्रसंग 20
अंतिम स्तुति और नाम की महिमा