ग्रंथसार
राजमहल की सभाओं में प्रभु श्री राम ने अपनी प्रजा को जीवन का सार समझाया, जो कालान्तर में कागभुशुण्डि और गरुड़ के संवाद का आधार बनी।
उत्तरकाण्ड · प्रसंग 3
प्रजा को उपदेश और कागभुशुण्डि की कथा