ग्रंथसार
क्या भक्ति केवल मंदिरों की देहरी तक सीमित है, या यह हृदय के भीतर बहने वाली कोई निरंतर धारा है?
भक्ति साधना · पाठ 1
भक्ति का स्वरूप